योग का शाब्दिक अर्थ है जुड़ना या जोड़ना, तथा भोग से तात्पर्य सुख-दुःख का अनुभव या भोजन से है । पश्चिमी दुनियां के लोग तृप्ति के लिये भोजन और भोजन से सुख की प्राप्ति ही...
" भवानी शंकरौ वन्दे श्रद्धाविश्वास रूपिणौ " वन्दना के इन स्वरों में गोस्वामी तुलसीदास जी ने श्रद्धा को भवानी और विश्वास को शंकर का स्वरूप कहा है । भव से तारन...
गोस्वामी तुलसीदास जी ने कहा है - " सुर नर मुनि सब कै यह रीती, स्वारथ लागि करहि सब प्रीती " यानी कि देवता, मनुष्य और मुनि सभी अपने हित लाभ के लिए ही प्रेम का प्रदर्श...